बेहतर समाज का निर्माण।
एक स्वस्थ, समृद्ध, सुशिक्षित एवम् खुशहाल समाज के प्रति हमें अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना जरूरी है। एक परिवार,समाज, राष्ट्र की पहली इकाई व्यक्ति है। जहां दैनिक जीवन में शिक्षा, रहन सहन, बीमारी ,शादी, उत्सव के लिए हम सभी अपनी आर्थिक क्षमता, एवं विवेक के अनुसार योजना बनाते हैं। लेकिन जब बच्चे को जन्म देने , परिवार बढ़ाने की बात आती है तो बच्चे के जन्म के बाद उसके भविष्य, शिक्षा जैसे विषयों पर निर्णय लेते हैं। जबकि बच्चे के गर्भधारण से पहले बच्चे में क्या विशेषता हो इसके विषय ध्यान नहीं रख पाते हैं। जबकि पति पत्नी के मानसिक, पारिवारिक, व्यक्तिगत स्वस्थ का प्रभाव ही भ्रूण को विकसित होने में अहम भूमिका निभाता है। हममें से ज्यादातर लोगों ने द्वापर में अभिमन्यु के चक्रव्यूह तोड़ने की कला मां के गर्भ में सीखने का विवरण मिलता है। ऐसे में एक सबसे जरूरी प्रक्रिया को नजरंदाज करके एक सुसंस्कृत समाज की कल्पना कैसे कर सकते हैं।
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